होलिका दहन 2026 कब करें?
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होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को सूर्यास्त के बाद किया जाता है, पर उस समय भद्रा नहीं होनी चाहिए। भद्रा के समय होलिका दहन करना निषेध है।
इस वर्ष 2 मार्च को 17: 18 पर पूर्णिमा तिथि लगते ही भद्रा लगेगी जो अगले सूर्योदय पूर्व 05:19 तक रहेगी।
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च को ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण है। निर्णयसिन्धु में कहा है कि पूर्णिमा को ग्रहण हो तो उससे पूर्वरात्रि में जिस समय भद्रा न हो उसमें होली जलाए।
लेकिन अगर दूसरे दिन ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण हो तो पिछले दिन भद्रारहित रात्रि के चौथे प्रहर में सूर्योदय से पहले या फिर रात्रि में भद्रा के पुच्छभाग में होली जलाए।
“तत्र ग्रहणनिर्णयः।
अत्र चेच्चन्द्रग्रहण तदा ततोर्वानिशि भद्रावर्जं पौर्णमास्यां होलिकादीपनम्। अथ परेऽह्निग्रस्तोदयास्तदा पूर्वदिने भद्रावर्णं रात्रौ चतुर्थयामे विष्टिपुच्छे वा होलिका कार्या।” –
निर्णयसिन्धु
जयसिंह कल्पद्रुम में तो प्राचीन परंपरानुसार भविष्योत्तरपुराण के प्रमाण से ‘भद्रान्ते सूर्योदयात् पूर्वे’ ही सर्वश्रेष्ठ माना है,
‘यदा तु प्रदोषे पूर्वदिने भद्रा भवति परदिने चास्तात्पूर्वमेव पंचदशी समाप्यते तदा सूर्योदयात्पूर्वं भद्रान्तं प्रतीक्ष्य होलिका दीपनीया।’
अतः इस साल 2-3 मार्च की रात्रि में निम्न मुहूर्त में होलिका दहन शास्त्रसम्मत है-
2 मार्च सोमवार को रात्रि में भद्रासमाप्ति पर सूर्योदय से पूर्व – 05:19 – 06:55 AM के मध्य
या फिर भद्रापुच्छ – रात्रि में 12 बजकर 50 से 2 बजकर 25 मिनट AM
यहां स्पष्ट है कि किसी भी स्थिति में प्रदोष के समय होलिकादहन इस वर्ष पूर्णतः शास्त्र विरुद्ध है। इसलिए 2 मार्च को प्रदोषकाल में इस साल होलिका दहन नहीं हो सकता है।
भद्रा में होलिकादहन कथमपि शास्त्रसम्मत नहीं है क्योंकि,
भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।
श्रावणी नृपति हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी॥
निर्णयसिन्धु
श्रावणी और होलिकादन भद्रा होने पर न करे। भद्रा में श्रावणी से राजहानि तथा होलिकादहन से ग्रामदाह होता है।
भद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभंगं करोति वै।
पुराणसमुच्चय
भद्रा में होली दाह से राष्ट्रभंग होता है।
3 मार्च को भी प्रदोषकाल में होलिका दहन नहीं हो सकता क्योंकि 3 को प्रदोष में पूर्णिमा ही नहीं है और प्रतिपदा में होलिका दहन निषिद्ध है :-
नन्दायां नरकं घोरं भद्रायां देशनाशनम्।
दुर्भिक्षं च चतुर्दश्यां करोत्येव हुताशनः॥
विद्याविनोद
प्रतिपदा में होलिकादाह से नरक, भद्रा में देशनाश, और चतुर्दशी में करने से दुर्भिक्ष होता है।
प्रतिपद्भूतभद्रासु यार्चिता होलिका दिवा।
संवत्सरं तु तद्राष्ट्रं पुरं दहति साद्भुतम्॥
चन्द्रप्रकाश
प्रतिपदा, चतुर्दशी, भद्रा और दिन, इनमें होली जलाना सर्वथा त्याज्य है। कुयोगवश यदि जला दी जाए तो वहाँ के राज्य, नगर और मनुष्य अद्भुत उत्पातों से एक ही वर्ष में हीन हो जाते हैं।
आपका तन मन स्वस्थ्य रहें आप दीर्घायु हों आपका जीवन मंगलमय हो प्रभू की कृपा अनवरत आप पर बनी रहे।
