प्रयागराज। देश की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था मदद फाउंडेशन ने भीषण गर्मी में फुटपाथों पर जीवन यापन करने वाले निराश्रित, असहाय और दिव्यांग लोगों के लिए एक सराहनीय पहल की शुरुआत की है। संस्था द्वारा ऐसे जरूरतमंद लोगों को निशुल्क जूते एवं चप्पल वितरित करने का अभियान प्रारंभ किया गया है, ताकि तपती सड़कों और फुटपाथों पर नंगे पैर चलने की मजबूरी से उन्हें राहत मिल सके।
संस्था के संस्थापक मंगला प्रसाद तिवारी ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य उन हजारों लोगों तक राहत पहुंचाना है, जिनके पास जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की भी कमी है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान सड़क और फुटपाथ का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे नंगे पैर रहने वाले लोगों के पैरों में घाव और गंभीर समस्याएं हो जाती हैं। ऐसे में यह छोटा सा प्रयास उनके जीवन में बड़ी राहत साबित हो सकता है।
मदद फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की सेवा में निरंतर सक्रिय है। संस्था द्वारा संचालित “रविवार की रसोई” अभियान के माध्यम से हर रविवार शहर के विभिन्न स्थानों पर फुटपाथों पर रहने वाले सैकड़ों जरूरतमंदों तक निशुल्क भोजन और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाता है। इसके साथ ही संस्था जरूरतमंदों को आवश्यक संसाधन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है।
संस्था की सामाजिक पहल का दायरा केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है। गत वर्ष प्रयागराज में जल निगम और नगर निगम के सहयोग से शहर के विभिन्न स्थानों पर शुद्ध पेयजल की टंकियां स्थापित कराई गई थीं, जिनसे प्रतिदिन हजारों लोग लाभान्वित हुए। संस्था का लक्ष्य है कि इस वर्ष भी जिलाधिकारी, महापौर और जल निगम के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे प्रयागराज शहर में पेयजल टंकियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भीषण गर्मी में आमजन को राहत मिल सके।
संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि मदद फाउंडेशन को इन सेवा कार्यों के लिए किसी भी प्रकार का सरकारी अनुदान प्राप्त नहीं होता। संस्था के सदस्य ही अपनी आय का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा समाजसेवा के लिए समर्पित करते हैं, जिससे रविवार की रसोई सहित अन्य सामाजिक अभियान निरंतर संचालित हो रहे हैं।
मदद फाउंडेशन का मानना है कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग तक सहायता पहुंचाना केवल सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है। संस्था की यह पहल न केवल निराश्रित लोगों को राहत दे रही है बल्कि समाज में सेवा, संवेदना और सहयोग की भावना को भी मजबूत कर रही है।