राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय,संस्कृति विभाग को दान में मिलीं पांडुलिपियाँ

तालमेल एक्सप्रेस

प्रयागराज।राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय, संस्कृति विभाग उ0प्र0, अल्लापुर, प्रयागराज एवं किशोरी लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नैनी, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक सम्पदा के रूप में पाण्डुलिपियों को संरक्षित किये जाने हेतु पाण्डुलिपि दान समारोह नामक एक कार्यक्रम का आयोजन डॉ किशोरी लाल पी.जी.कालेज नैनी के पुस्तकालय सभागार में किया गया।कार्यक्रम के अन्तर्गत इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व सहा0आचार्य स्व0 प्रो० (डॉ०) किशोरी लाल के संग्रह की मूल पाण्डुलिपियाँ, लीथोप्रति, पांडुलिपियों की छायाप्रति एवं दुर्लभ प्रकाशित ग्रंथों को राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय, संस्कृति विभाग उ0प्र0, प्रयागराज को दान की गईं इसका मुख्य उद्देश्य अमूल्य धरोहर का वैज्ञानिक प्रविधि से संरक्षण किए जाने तथा अगली पीढ़ी को शोध हेतु उपलब्ध कराया जाना है। डा0 अजय कुमार, पूर्व विधायक “बारा” एवं संस्थापक प्रबन्धक, किशोरी लाल पी0जी0 कालेज मन्नीलाल शिक्षण समिति, 121, चक दाउद नगर, नैनी, प्रयागराज द्वारा दान की गई इस अमूल्य संपदा हेतु संस्कृति विभाग दानकर्ता व प्रेरक समिति का आभार व्यक्त करता है । इन पांडुलिपियों में प्राचीनतम् सन 1713 में केशवदास की रचना “कविप्रिया” है।इसके अतिरिक्त सन 1797 की रचना सुभाषित रत्नावली (प्राकृत ब्रज भाषा कवियों का संग्रह ),बावनी सवैया,भाषा भूषण,नखशिख,प्रेम सती,रसखान बिहारी सतसई ,रस रत्नावली , कृष्णलीला ,तुलसी दोहावली आदि महत्वपूर्ण पांडुलिपियाँ दान स्वरूप प्राप्त हुई हैं । इस संग्रह को डॉ० पन्ना लाल आई.पी.एस. (पूर्व ए.डी.जी. एवं गृह सचिव, मध्य प्रदेश शासन) के निजी प्रयास से किशोरी लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नैनी, प्रयागराज में संरक्षित किया गया था इस संग्रह से आम शोधार्थियों को लाभान्वित किए जाने के उद्देश्य से प्रबन्ध समिति ने एक मंत्रणा की तदोपरान्त डा0 पन्नालाल जी एवं कलिंगा युनिवर्सिटी, रायपुर, छत्तीसगढ़ के प्रो० (डॉ०) प्रदीप कुमार केसरवानी जी तथा दानकर्ता डा0 अजय कुमार, संस्थापक प्रबन्धक, किशोरी लाल पी0जी0 कालेज मन्नीलाल शिक्षण समिति, नैनी व डा0 कमल किशोर राठौर पुत्र स्व0 डा0 किशोरी लाल नैनी, प्रयागराज ने सम्यक विचारोपरांत इस संग्रह को राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय, संस्कृति विभाग उ0प्र0, अल्लापुर, प्रयागराज को दान स्वरूप प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है। इस संग्रह की कुछ पाण्डुलिपियों एवं लीथोप्रिंट ग्रंथ को ईश्वरशरण पी0जी0 कालेज के प्राचीन इतिहास विभाग द्वारा स्थापित संग्रहालय को दान किए जाने का निर्णय दानकर्ता ने लिया। ईश्वरशरण पी0जी0 कालेज के सहा0 आचार्य डा0 जमील अहमद ने अपने कालेज के संग्रहालय हेतु प्राप्त किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुये डा0 पन्नालाल आई.पी.एस. ने कहा कि राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय को दी जाने वाली यह पांडुलिपियों हमारे गुरु प्रोफेसर स्वर्गीय किशोरी लाल जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कलिंगा युनिवर्सिटी, रायपुर, छत्तीसगढ़ के प्रो० (डॉ०) प्रदीप कुमार केसरवानी ने बताया कि ग्रंथों का दान सबसे बड़ा दान है, और यह एक महान पुण्य कार्य है डा0 अजय कुमार, पूर्व विधायक, बारा ने दान के महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि दान योग्य समय में योग्य व्यक्ति को ही दिया जाना चाहिए पुस्तकालय में इन पांडुलिपियों का सम्यक संरक्षण हो सकेगा l ईश्वरशरण पी0जी0 कालेज के सहा0 आचार्य डा0 जमील अहमद ने कहा कि भारत सरकार पांडुलिपियों के प्रति अति संवेदनशील है पांडुलिपि अध्ययन परक कई कोर्स भी संचालित किए गए हैं अतः वर्तमान समय में पांडुलिपियों का अध्ययन भी रोजगार एवं शिक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। स्व0 प्रो० (डॉ०) किशोरी लाल के साहित्यिक संग्रह की 99 पाण्डुलिपियाँ, लीथोप्रति की 06 पाण्डुलिपियाँ, छायाप्रति की 10 पाण्डुलिपियाँ तथा 20 दुर्लभ प्रकाशित ग्रंथ स्व0 प्रो० (डॉ०) किशोरी लाल द्वारा लिखित तीन रजिस्टर को राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय की ओर से पाण्डुलिपि अधिकारी गुलाम सरवर ने प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होने डा0 पन्नालाल जी, प्रो० (डॉ०) प्रदीप कुमार केसरवानी एवं डा0 अजय कुमार, संस्थापक के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि इस संग्रह के वैज्ञानिक संरक्षण एवं डिजिटिलाइजेशन के उपरान्त इस ज्ञान भण्डार को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित किया जा सकेगा। उन्होने इसकी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर राजकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय, संस्कृति विभाग उ0प्र0, अल्लापुर, प्रयागराज एवं किशोरी लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नैनी, प्रयागराज के कर्मी ईश्वर शरण शुक्ला सहित स्थानीय प्रबुद्ध जन की उपस्थिति रही।

Comments (0)
Add Comment