विभिन्न प्रकार की चट्टानों, खनिजों, अयस्कों और जीवाश्मों की प्रदर्शनी
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तालमेल एक्सप्रेस
प्रयागराज। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने महाकुंभ मेला क्षेत्र में सेक्टर 1 त्रिवेणी रोड पर ओडी फोर्ट चौराहे के पास प्रदर्शनी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की चट्टानों, खनिजों, अयस्कों और जीवाश्मों को प्रदर्शित किया है। विशेष रूप से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में प्रयुक्त चट्टानों में राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से गुलाबी बलुआ पत्थर, राजस्थान से सफेद संगम मारन और कर्नाटक के चिकबल्लापुर से लाया गया ग्रेनाइट शामिल हैं। प्रदर्शनी में मुख्य आकर्षण राम लला की मूर्ति के निर्माण में प्रयुक्त चट्टान (स्टीटाइट) है, जो कर्नाटक के मैसूर जिले की खदानों से है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के वैज्ञानिक डॉ आशीष कुमार पांडे ने कहा कि प्रदर्शित खनिज अयस्कों में मुख्य रूप से बॉक्साइट (एल्यूमीनियम अयस्क) हैं, इससे एल्युमीनियम निकाला जाता है, हेमेटाइट (लौह अयस्क) जिससे लोहा निकाला जाता है उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पाए जाने वाले सोने से भरपूर क्रिस्टल को प्रदर्शित किया गया है और जिस किंबरलाइट चट्टान से मेहिरा पाया जाता है वह भारत में पन्ना (मध्य प्रदेश) की खदानों से है। यहां आपको लाखों-करोड़ों साल पहले के जीवाश्म मिलेंगे जैसे स्ट्रोमेटोलाइट्स, अमोनाइट्स, पौधों के जीवाश्म और खासकर डायनासोर के अंडों के जीवाश्म प्रदर्शित किए गए हैं, जो पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति से लेकर जीवन के विकास को दर्शाते हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने पोस्टर और नमूनों की एक आकर्षक प्रदर्शनी के माध्यम से अपनी उपलब्धियों और विभिन्न भूवैज्ञानिक गतिविधियों को प्रदर्शित किया है, जो भारत की समृद्ध भूवैज्ञानिक विरासत की झलक देता है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की इस प्रदर्शनी ने छात्रों के साथ-साथ आम जनता और प्रदर्शनी में आए अन्य संस्थानों के प्रतिभागियों को भी आकर्षित किया है।
