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तीन दिवसीय जनजातीय उत्सव को हुआ आगाज

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कभी देवताओं की आराधना, कभी लोकजीवन की आस्था तो कभी भारतीय संस्कृति की शाश्वत चेतना इन सभी भावों को समेटे नृत्य-नाट्य “शिप्रा” ने शनिवार की शाम उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। लगभग एक घंटे दस मिनट तक चली प्रस्तुति में कलाकारों ने नृत्य, संगीत और अभिनय के सशक्त समन्वय से उज्जयिनी की जीवनदायिनी शिप्रा नदी की सांस्कृतिक यात्रा को सजीव कर सभागार को देर तक तालियों की गूंज से भर दिया।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय जनजातीय उत्सव के पहले दिन नाट्य प्रस्तुति का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री वरुण पांडे, रजिस्ट्रार, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, प्रयागराज, श्री सुदेश शर्मा, निदेशक, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र एवं श्रीमती कल्पना सहाय,कार्यक्रम सलाहकार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। संगीता शर्मा के निर्देशन में मंचित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति में दिखाया गया कि आठ खंडों में विभाजित इस नृत्य-नाट्य में शिप्रा नदी की पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा को आकर्षक ढंग से मंचित किया गया। भारतीय समकालीन नृत्य, लोकनृत्य, संगीत, अभिनय और प्रभावशाली मंच सज्जा के माध्यम से शिप्रा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवन, करुणा, ऊर्जा और लोकमंगल की शाश्वत धारा के रूप में प्रस्तुत किया गया।प्रस्तुति में दर्शाया गया कि शिप्रा ने सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग से लेकर वर्तमान समय तक मानव सभ्यता, धर्म-अधर्म के संघर्ष, संस्कृति के विकास और समाज के बदलते स्वरूप की साक्षी बनकर भारतीय परंपरा को समृद्ध किया है। कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण अभिनय और नृत्य प्रस्तुति से शिप्रा की सांस्कृतिक महत्ता को जीवंत कर दिया।
नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और जीवन की आधारशिला हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए
नाटक की रचना योगेश त्रिपाठी ने की है, जबकि संगीत संयोजन कुलदीप सारवा एवं दुर्ग द्वारा किया गया। नाट्य प्रस्तुति में प्रियंका शर्मा, श्रेयसी चौधरी, मेघना रायकवार, ट्विंकल, संजन श्याम, सेजल राजपूत, एंजेल जैन, भूमि साहू, आनंद मिश्रा और रचना मिश्रा ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों से खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर केंद्र के निदेशक श्री सुदेश शर्मा ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों तथा नाट्य निर्देशिका संगीता शर्मा को अंगवस्त्र एवं पौधा भेंटकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन आकाश अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर केंद्र के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी सहित जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के प्रतिनिधि आनंद मिश्रा मौजूद रहे।

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