रेल संचालन होगा अधिक सुरक्षित और समयबद्ध
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मोहसा-करौंदा-अगासोद-बीना खंड में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू
तालमेल एक्सप्रेस
प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल के अंतर्गत मोहसा-करौंदा-अगासोद-बीना खंड में रेल संचालन को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और समयबद्ध बनाने के लिए ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है।यह उपलब्धि महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के कुशल मार्गदर्शन, प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता दीपक कुमार सिन्हा, मंडल रेल प्रबंधक-झांसी मंडल अनिरुद्ध कुमार के नेतृत्व तथा मुख्यालय व झांसी प्रोजेक्ट यूनिट की टीम के सक्रिय सहयोग से हासिल हुई है। इस नई तकनीक के शुरू होने से अब ट्रेनें एक-दूसरे के पीछे कम दूरी (सुरक्षित अंतराल) पर भी सुचारू रूप से चलाई जा सकेंगी, जिससे खंड की लाइन क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की पंक्चुअलिटी (समयबद्धता) में सुधार होगा। साथ ही, स्वचालित प्रणाली से ट्रेन संचालन के दौरान मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और अधिक सुनिश्चित हो सकेगी। कठिन भू-भाग में प्रोजेक्ट यूनिट झांसी द्वारा एक ही दिन में तीन ब्लॉक सेक्शनों को चालू किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। परियोजना के अंतर्गत किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं मोहासा एवं करौंदा स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को उन्नत किया गया है, जिससे सिग्नल संचालन अधिक सटीक और तेज़ हो गया है। ट्रेन की सटीक स्थिति का पता लगाने और सिग्नलिंग को और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए खंड में 144 अत्याधुनिक ट्रैक डिटेक्शन उपकरण (MSDAC) लगाए गए हैं। सेक्शन में 27 नए चार पहलू वाले सिग्नल लगाए गए हैं तथा मोहासा एवं करौंदा स्टेशन के 12 मौजूदा सिग्नलों को अपग्रेड कर चार पहलू वाला बनाया गया है। इससे लोको पायलट को दूर से ही स्पष्ट संकेत मिलते हैं, जिससे ट्रेन की गति और नियंत्रण में सुधार होगा। अगासोद-करौंदा सेक्शन के नॉन-इंटरलाॉक समपार फाटक संख्या 313 को भी इंटरलॉक किया गया है, जिससे रेल सफर और अधिक सुरक्षित होगा। प्रोजेक्ट यूनिट झांसी द्वारा झांसी डिवीज़न के महत्वपूर्ण इंटरचेंज पॉइंट पर अप और डाउन लाइन में की गई यह कमीशनिंग रेल संरक्षा को सशक्त करने के साथ-साथ यात्रियों को अधिक समयबद्ध, सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।